दरभंगा, नवम्बर 22 -- दरभंगा। सत्य सबसे ऊपर है, यदि उससे भी ऊपर कुछ है तो वह है सत्य का आचरण। जीवन में धर्म का आचरण करें। धर्म का तात्पर्य कर्तव्य भाव है, संप्रदाय-पंथ नहीं। स्वाध्याय से प्रमाद न करें अर्थात आजीवन विद्यार्थी मानसिकता से सतत सीखने का प्रयास करते रहें। लनामिवि के दीक्षांत समारोह में शुक्रवार को दीक्षांत भाषण देते हुए शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए उक्त बातें कही। डॉ. कोठारी ने कहा कि भारतीय शिक्षा का आधारभूत लक्ष्य छात्रों के चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास है। आज देश और दुनिया के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है चरित्र का संकट। अधिकतर समस्याओं के मूल में चारित्रिक संकट ही है। आज आवश्यकता है हमारी शिक्षा व्यवस्था के इसी आधारभूत लक्ष्य की ओर...