अलीगढ़, नवम्बर 28 -- सिस्टम की छत्रछाया में 'बेधड़क अस्पताल' पंजीकरण रुका, अस्पताल खुले, जांच सिर्फ कागजों में पूरी, नियमों की धज्जियां उड़ा रहे अस्पताल, अधिकारी रहे मौन अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई किसी भी नागरिक की रूह कंपा देने के लिए काफी है। बिना पंजीकरण, बिना लाइसेंस और बिना योग्य डॉक्टरों के अस्पताल खुलेआम चल रहे हैं, मानो मरीजों की जान की कोई कीमत ही न हो। सीएमओ कार्यालय में महीनों से रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण की फाइलें धूल फांक रही हैं, जबकि अस्पताल धड़ल्ले से मरीज भर्ती कर लाखों कमा रहे हैं। निरीक्षण कागजों में पूरा कर लिया जाता है, पर जमीनी हकीकत मौत को दावत देने जैसी है। देहात क्षेत्रों में संचालित अस्पताल इस गड़बड़ी की सबसे बड़ी मिसाल हैं, जहां नियम, कायदे और जवाबदेही सब कुछ ताक पर रखा गया है। स्वास्थ्...