नई दिल्ली, दिसम्बर 18 -- नई दिल्ली। विशेष संवाददाताा सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि सत्र न्यायालय को बिना किसी छूट के उम्रकैद की सजा देने का अधिकार नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि दोषी को बिना किसी छूट के उम्रकैद की सजा देने का अधिकार सिर्फ संवैधानिक अदालतें यानी उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट के पास है। जस्टिस एहसानुद्दीन अमानुल्लाह और के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा है कि किसी आरोपी को दी गई उम्रकैद की सजा उसकी बाकी जिदगी के लिए होगी और छूट और सजा कम करने का अधिकार सत्र अदालत द्वारा कम नहीं किया जा सकता। पीठ ने कहा है कि सत्र अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा को प्राकृतिक जीवन के अंत तक के लिए निर्देशित नहीं किया जा सकता क्योंकि ऐसा करना अपराध प्रक्रिया संहिता के खिलाफ होगा। शीर्ष अदालत ने एक विधवा की हत्या के मामले म...