नई दिल्ली, जनवरी 27 -- तीस हजारी कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए साफ किया है कि किसी शख्स की ओर केवल पिस्टल तान देना अपने-आप में हत्या के इरादे को साबित नहीं करता। इसी आधार पर अदालत ने एक पुलिसकर्मी की हत्या के प्रयास मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। हालांकि, अदालत ने अवैध हथियार रखने के मामले में आरोपी को दोषी ठहराया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ की अदालत ने सागर उर्फ रिंकू के खिलाफ दर्ज मामले में यह टिप्पणी की। अदालत ने फैसले में कहा कि बिना किसी अतिरिक्त ठोस कार्रवाई के यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि आरोपी का निश्चित रूप से हत्या करने का इरादा था या वह ट्रिगर दबाने ही वाला था। यह मामला 14 जुलाई 2020 का है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, पुलिस को सूचना मिली थी कि सागर उर्फ रिंकू किसी आपराधिक वारदात को अंजाम देने के इरादे से ...