नई दिल्ली, दिसम्बर 24 -- आज के दौर में सिनेमा हॉल में फिल्म देखने जाएं और पॉपकॉर्न न खाएं, ऐसा लगभग नामुमकिन सा लगता है। मूवी और पॉपकॉर्न का कॉम्बिनेशन इतना मशहूर हो चुका है कि दोनों को एक-दूसरे से अलग करके सोचना ही मुश्किल है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शुरुआती दौर में सिनेमा हॉल्स में पॉपकॉर्न की एंट्री बिल्कुल बैन थी?शुरू में थिएटर्स में बैन थे पॉपकॉर्न 1920 के दशक में थिएटर मालिक अपने हॉल्स को क्लासिकल थिएटर की तरह लग्जरी बनाए रखना चाहते थे। इसमें आलीशान कारपेट और आरामदायक सीटें होती थीं। सिनेमाघर मालिकों को डर लगता था कि पॉपकॉर्न के दाने फर्श पर गिरकर गंदगी फैलाएंगे, इसलिए लोगों को थिएटर के बाहर ही अपने स्नैक्स छोड़ने पड़ते थे।शुरू में थिएटर्स के बाहर बिकते थे फिर 1927 में जब साउंड वाली फिल्में यानी 'टॉकीज' आए, तो सिनेमा का चलन आम लो...