नई दिल्ली, सितम्बर 15 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने आगामी 22 सितंबर से राज्य में जातीय जनगणना कराने का फैसला लिया है लेकिन उनका यह फैसला उनकी पार्टी के लिए मुसीबत बनती जा रही है क्योंकि राज्य के प्रभावशाली लिंगायत समुदाय के लिए यह जनगणना उनकी धार्मिक पहचान के लिए एक बड़ी लड़ाई बन चुकी है। वैसे तो लिंगायत समुदाय जाति सर्वेक्षण में भाग लेने के लिए तैयार है लेकिन समुदाय में इस बात को लेकर मतभेद है कि जाति गणना के सर्वे में लिंगायत समुदाय के सदस्यों को अपनी धार्मिक पहचान वीरशैव-लिंगायत के रूप में दर्ज करानी चाहिए या हिंदू के रूप में। सिद्धारमैया सरकार में वन मंत्री ईश्वर खांड्रे ने हाल ही में वीरशैव-लिंगायत महासभा की ओर से बोलते हुए कहा कि समुदाय के सदस्यों को धर्म वाले कॉलम में 'अन्य' चुनना चाहिए और खुद को वीरशैव-लिंगायत के रूप मे...
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