भभुआ, जुलाई 28 -- (पेज चार) भभुआ। शहर के तिवारी टोला निवासी डॉ. विवेकानंद तिवारी ने बताया कि सावन में शिवलिंग का रूद्राभिषेक का महत्व बढ़ जाता है। रुद्राभिषेक की पवित्र रस्म समुद्र मंथन की कथा से गहराई से जुड़ी हुई है। मंथन के दौरान घातक हलाहल विष निकला, जिसे भगवान शिव ने दुनिया को बचाने के लिए पी लिया। विष ने उनके शरीर में अत्यधिक गर्मी पैदा कर दी। उन्हें शांत करने के लिए देवताओं ने लगातार उनपर जल डाला। इसी वजह से सावन के दौरान शिवलिंग पर जल और अन्य पवित्र चीजें चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई। उन्होंने बताया कि ज्योतिषीय दृष्टि से सावन को नए उद्यम और आध्यात्मिक साधना शुरू करने के लिए शुभ समय माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस महीने में ब्रह्मांडीय ऊर्जा, व्यक्तिगत विकास, आत्म-अनुशासन और गहन आत्मनिरीक्षण के लिए अनुकूल होती है। ज्योतिष शास्त्र क...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.