नई दिल्ली, जुलाई 25 -- जब आसमान तपता है और धरती झुलसती है, तब सावन का महीना बरसात की झड़ी लगाकर सबके मन को तृप्त कर देता है। यह केवल मौसम का परिवर्तन नहीं, एक गहरे आध्यात्मिक अनुभव का उद्घोष है। यह वह अवस्था है, जब भीतर प्रेम की वर्षा होने लगती है और तन-मन उसमें भीगने लगता है। धरती जेठ और आषाढ़ में जो तपस्या कर रही थी, वह सावन के आने पर आनंदित हो उठती है। तप मतलब अग्नि! पुराने समय में हठयोगी पंच अग्नि तापते थे। एक सूर्य रूप अग्नि ऊपर आकाश में है और योगी खुले आकाश के नीचे बैठकर अपने चारों ओर अग्नि जलाते थे। उस पंच अग्नि के मध्य में बैठकर अग्नि को तापते थे, मंत्रों का जाप करते थे, प्राणायाम करते थे, सूर्य उपासना करते थे। ऐसे ही, परमात्मा रूप पति से मिलने की चाह लेकर जब जीव तपस्या करे, तो इसे कहते हैं कि यह उसके साधना काल का आषाढ़ महीना है। य...