नई दिल्ली, जनवरी 14 -- आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमने घड़ी की सुइयों के साथ दौड़ना तो सीख लिया, लेकिन शरीर की सबसे बुनियादी जरूरत'नींद'को कहीं पीछे छोड़ आए हैं। ज्यादातर लोग आज या तो काम के बोझ या फिर स्क्रीन की चकाचौंध की वजह से सिर्फ 5-6 घंटे की नींद को ही पर्याप्त मान बैठे हैं। जबकि नींद के दौरान हमारा शरीर सो नहीं रहा होता, बल्कि शरीर कोशिकाओं की मरम्मत करता है, ऊर्जा भरता है, और हार्मोन व प्रोटीन जारी करता है ताकि वह अगले दिन के लिए तैयार हो सके। आईएसआईसी मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में कार्डिएक साइंसेज डॉ. असीम ढल कहते हैं कि नींद कोई विलासिता (luxury) नहीं, बल्कि जीवित रहने का एक अनिवार्य तंत्र है। जिस तरह एक लंबी यात्रा के बाद मशीन को ठंडा होने और सर्विसिंग की जरूरत पड़ती है, ठीक वैसे ही रात के ये अंधेरे घंटे हमारे दिमाग की सफाई...
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