रांची, अप्रैल 26 -- रांची, विशेष संवाददाता। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एनएलयू) कांके की छात्रा के साथ गैंगरेप मामले के सजायाफ्ता राजन उरांव की याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। प्रार्थी ने खुद को नाबालिग बताते हुए हाईकोर्ट से जुबेनाइल जस्टिस एक्ट का लाभ देने का आग्रह किया है। सुनवाई के दौरान राजन उरांव की ओर से कहा गया कि घटना के समय उसकी उम्र 18 वर्ष से कम थी, इसलिए जुवेनाइल जस्टिस प्रोटेक्शन एक्ट के तहत उसे लाभ देना चाहिए। सरकार की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि जुबेनाइल के संबंध में छह साल बाद क्रिमिनल अपील में अपीलकर्ता ने मामला उठाया है। अनुसंधानकर्ता को उसने पूर्व में इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी थी। घटना के छह वर्ष बीत जाने के बाद इस स्टेज में पार्थी के मेंटल स्टेटस का आकलन करना संभव नहीं है...
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