प्रतापगढ़ - कुंडा, फरवरी 20 -- प्रोफेसर राजेंद्र सिंह रज्जूभैया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार सिंह ने कहा कि सामाजिक समरसता में नाथ साहित्य आज भी प्रासंगिक है। वह शुक्रवार को एमडीपीजी कॉलेज में सामाजिक समरसता में नाथ साहित्य का योगदान विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जो समान रूप से समाज में हो वही समरस है। समरसता में चार तत्व समानता, सौहार्द्ध, सामंजस्य और सम्मान निहित हैं। इनमें से जब किसी भी तत्व में कोई विकार उत्पन्न होता है तो साहित्यकार अपने निर्भीक, कठोर शब्दों से उसे सही दिशा प्रदान करता है। विशिष्ट अतिथि मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय बलरामपुर के कुलपति प्रोफेसर रविशंकर सिंह ने कहा कि दर्शन, कला, संगीत और साहित्य का अद्भुत समागम नाथ साहित्य में मिलता है। राजनीतिक संरक्षण के...