प्रयागराज, जनवरी 8 -- प्रयागराज, संवाददाता। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) की ओर केंद्र सभागार में चल रही शब्द-ब्रह्म संगोष्ठी के अंतर्गत गुरुवार को 'माघ मेला: सांस्कृतिक सरोकारों का महापर्व' विषय पर विशिष्ट वक्ताओं के बीच मंथन हुआ। मुख्य वक्ता डॉ. शिशिर कुमार सोमवंशी ने कहा कि मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है बल्कि भारत की अटूट आस्था, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। वर्तमान समय में यह महाजुटान राष्ट्र के लिए उपयोगी कार्यों, सामाजिक समरसता और पर्यावरण के प्रति जागरूकता के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। डॉ. सोमवंशी ने कहा कि गंगा-यमुना के मिलन की इस धरा पर केवल नदियों का प्रवाह नहीं होता है। साथ में युगों का विचार प्रवाह एकत्र होता है। प्रो. कुमार वीरेंद्र ने कहा कि हिन्दी पंचा...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.