लखनऊ, फरवरी 20 -- इप्टा कार्यालय में सोशल जस्टिस कॉन्क्लेव का दूसरा दिन चार सत्रों में युवाओं, इतिहास, पत्रकारिता और लोकतंत्र पर हुआ गंभीर विमर्श लखनऊ, संवाददाता। सोशल जस्टिस कॉन्क्लेव के दूसरे दिन शुक्रवार को विभिन्न सत्रों में वक्ताओं ने देश, समाज और लोकतंत्र से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। कैसरबाग स्थित इप्टा कार्यालय में आयोजित कॉन्क्लेव के पहले सत्र में 'युवा- चुनौतियां और उम्मीदें' विषय पर छात्र महासभा से जुड़े महेंद्र कुमार ने कहा कि इस देश में यदि कोई विपक्ष बचा है, तो वह विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले युवा हैं। आइसा के शांतम ने बताया कि विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न चरम पर है और शासन - प्रशासन इस सामाजिक बुराई की खिलाफ काम करने से दूर भागता है। दूसरे सत्र में प्रोफेसर रूपरेखा वर्मा ने कहा कि सामाजि...