बेगुसराय, फरवरी 24 -- नावकोठी, निज संवाददाता। पवित्र माह रमजान का आगाज़ होते ही क्षेत्र में इबादत, संयम और सामाजिक भाईचारे का वातावरण बन गया है। यह महीना सामाजिक समानता का एक जीवंत उदाहरण है जहां अमीर-गरीब का भेद स्वतः मिट जाता है। सभी मुसलमान एक साथ रोज़ा रखकर भूख और प्यास का समान अनुभव करते हैं जिससे सहानुभूति, करुणा और भाईचारे की भावना सुदृढ़ होती है। ये बातें नावकोठी जामा मस्जिद के इमाम मौलाना असगर ने सोमवार की रात कहीं। उन्होंने कहा कि रमजान केवल उपवास का महीना नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, आत्मसंयम और सामाजिक जिम्मेदारी का भी संदेश देता है। दिनभर रोज़ा रखकर इंसान भूख की पीड़ा को महसूस करता है जिससे उसे जरूरतमंदों की तकलीफ समझने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि रमजान के दौरान सामूहिक इफ्तार और मस्जिदों में एक साथ नमाज अदा करने से सामाज...