बांका, जनवरी 21 -- रजौन(बांका), निज संवाददाता। शैक्षणिक सहित अन्य कई सामाजिक क्षेत्रों में अमूल्य योगदान देने वाले अति अल्पसंख्यक जाति तिली समाज के लोग आज भी अपनी राजनीतिक सहित सामाजिक पहचान बनाने की जद्दोजहद कर रहे है। नियति की मार ने तिली जाति के लोगों को मुगलकाल व मराठा विद्रोह के समय पश्चिम बंगाल से तत्कालीन भागलपुर व वर्तमान में बांका जिला माइग्रेट करा दिया। इस जाति के लोगों की संख्या करीब 25 हजार है, जो बांका जिला के रजौन प्रखंड के पिपराडीह, धौनी, भूसिया, कठौन, महादा, असमानिचक, मड़नी,मालती, कटोरिया, कल्याणपुर, जगदीशपुर, पुनसिया वहीं धोरैया प्रखंड के गंगटी , शासन, जगता तथा बाराहाट प्रखंड के बनियाचक, फुलहारा आदि गांवों में निवास करते है। इस जाति ने यहां आने के बाद क्षेत्र में शैक्षणिक विकास के लिए बड़ा ही सराहनीय कार्य किए। कई स्कूल व...
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