मुजफ्फरपुर, जनवरी 24 -- मुजफ्फरपुर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। शहबाजपुर ब्र्रह्मस्थान परिसर में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन शनिवार को कथावाचक आचार्य वेदानंद शास्त्री आनंद ने कहा कि हमें सदैव सात्विक भोजन और सत्य वचन का पालन करना चाहिए। जैसा हमारा चित्त रहेगा वैसी हमारी चित्तवृत्ति होगी। प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए कहा कि विदुर के अनन्य प्रेम से वशीभूत श्री भगवान ने केले के छिलके और सूखे साग को खाया। भक्त के वश में भगवान हैं, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण विदुरजी पर कृपा से है। जीव के कल्याण का मार्ग क्या है। किस प्रयत्न से मानव के दुखों में कमी आ सकती है। हरेक जीव की यही आंतरिक इच्छा रहती है कि उनके जीवन में किसी प्रकार का दुःख और समस्या न आये। यह जीव के पूर्वार्जित धर्मं और प्रारब्ध पर निर्भर है। संसार को आपका सिर्फ तन और धन चाहिए। आपका म...