नई दिल्ली, जनवरी 11 -- नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। राउज एवेन्यू कोर्ट ने साइबर ठगी के एक बड़े मामले में स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति का नाम प्राथमिकी या पहली चार्जशीट में न होने पर उसे कोई कानूनी राहत नहीं मिलती। अदालत ने कहा कि आपराधिक जांच एक सतत प्रक्रिया है और आगे की जांच में यदि किसी की भूमिका सामने आती है, तो उसे आरोपी बनाया जा सकता है। इसी टिप्पणी के साथ विशेष न्यायाधीश शैलेंद्र मलिक की अदालत ने जापानी नागरिकों से साइबर धोखाधड़ी के मामले में वाराणसी स्थित कॉल सेंटर 'टेक्कु समुराई' से जुड़े आरोपी अमित सिंह भदौरिया की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। सीबीआई ने अदालत को बताया कि दिल्ली और उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से संचालित संगठित गिरोह तकनीकी सहायता के बहाने जापानी नागरिकों को निशाना बना रहा था। पीड़ितों के कंप्यूटर पर फर...
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