संभल, अगस्त 27 -- उत्तर भारत का प्रसिद्ध मेला गणेश चौथ सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है। मेले में चारों धर्मों के लोग बढ़चढ़ कर भागीदारी लेते हैं। यह मेला लंबे समय से देश वासियों को सांप्रदायिक एकता का संदेश देता आ रहा है। गणेश मेला परिषद की ओर से मेला गणेश चौथ वर्ष 1962 से आयोजित किया जा रहा है। हर साल गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले चारों धर्मों के प्रतिनिधि फीता काट कर मेले का आगाज करते हैं। खास बात यह है कि गणेश चतुर्थी पर कौमी एकता संगठन की ओर से गणेश के मुख्य मंदिर पर बूंदी के लड्डू का भोग लगाया जाता है और पोशाक चढ़ाई जाती है जिसमें सभी धर्मों के लोगों की भागीदारी रहती है। ठेले पर लड्डू और पोशाक रख कर गाजे बाजे के साथ भजन कीर्तन करते हुए वे गणेश मंदिर पहुंचते हैं। इतना ही नहीं मेला परिसर से सटी अर्श उल्ला खानबाबा की मजार पर चादरपोशी भी ...
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