हाजीपुर, जनवरी 9 -- महनार/बेलसर। सं.सू. महनार क्षेत्र में घाघरा, पटेढ़ी बेलसर इलाके की झाझा नदियों के सूखने का असर अब केवल पर्यावरण या खेती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी टूटने लगी है। कभी जिन नदियों से आसपास के कई समुदायों की आजीविका चलती थी, आज उनके सूखने से सैकड़ों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय मछुआरे रामेश्वर साह, विजय निषाद, सुनील निषाद और बबलू निषाद बताते हैं कि नदी में पानी नहीं रहने से मछली पकड़ना लगभग बंद हो गया है। पहले रोजाना होने वाली आमदनी पूरी तरह खत्म हो चुकी है। मछली पकड़ने के जाल बनाने और मरम्मत करने वाले कारीगरों को भी अब काम नहीं मिल रहा है। धोबी समुदाय के लखन धोबी, शंकर धोबी और किशोर धोबी कहते हैं कि पहले नदी में कपड़े धोना आसान था, लेकिन अब उन्हें मोटर चलाकर पानी...
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