रांची, सितम्बर 14 -- रांची। विशेष संवाददाता झारखंड हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि सहमति से बने संबंध को बलात्कार नहीं कहा जा सकता। जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने इस निर्देश के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रह रही महिला की ओर से दर्ज करायी प्राथमिकी रद्द कर दी। जस्टिस अनिल कुमार चौधरी ने अपने आदेश में कहा कि अभियुक्त और सूचक लगभग दस वर्षों (2014 से 2023) तक पति-पत्नी की तरह साथ रहे। इस दौरान सहमति से संबंध बने, जिसे बलात्कार नहीं कहा जा सकता। रांची के बुढ़मू थाना क्षेत्र में लिव-इन-रिलेशनशिप में रह रही महिला ने साथी पर बलात्कार का केस दर्ज कराया था। दर्ज प्राथमिकी में धारा 376 (बलात्कार) और 406 (आपराधिक न्यासभंग) भारतीय दंड संहिता के तहत आरोप लगाए गए थे। आरोपी पर तीन लाख रुपये वापस नहीं करने का भी आरोप लगाया था। जिस पर पुलिस ने कार्रवा...
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