नई दिल्ली, फरवरी 18 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि यदि कोई महिला सहमति से पहले शारीरिक संबंध बनाती है और फिर इन संबंधों को आपराधिक रूप देने की कोशिश करती है, तो इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की पीठ ने कहा कि कानून के दुरुपयोग की अनुमति नहीं दी जा सकती। पीठ ने कहा कि यदि किसी रिश्ते से महिला की उम्मीद टूट गई है, तो इसके लिए सजा का प्रावधान नहीं है। पहले सहमति से संबंध बनाना और फिर उन संबंधों को कानूनी दायरे में लाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। पीठ ने कहा कि जब दो बालिग जानबूझकर व सहमति से संबंधों में आने का फैसला करते हैं तो उसके परिणाम भी दोनों को मिल जुलकर उठाने चाहिए। पीठ ने यह बात एक वकील व उसके रिश्तेदारों को दुष्कर्म, धोखे से शादी व दूसरे गंभीर आरोपों से बरी करने के ...
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