लखनऊ, नवम्बर 25 -- लखनऊ, वरिष्ठ संवाददाता। सर्द, पछुआ हवा और प्रदूषण ने सांस के मरीजों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बदलते मौसम में सांस के मरीजों में जानलेवा अटैक हो रहा है। अस्पतालों में अस्थमा, सीओपीडी और निमोनिया के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। केजीएमयू रेस्पीरेटरी मेडिसिन विभाग के सभी छह वेंटिलेटर फुल हो गए हैं। केजीएमयू रेस्पीरेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि बदलता मौसम फेफड़े के मरीजों के लिए घातक है। ठंडी हवा से निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है। वहीं वातावरण में प्रदूषण के महीन कण व स्मॉग सांस के जरिए फेफड़ों में समा जाता है जिससे सांस की नली व फेफड़े में सूजन पैदा होती है। नतीजतन मरीज को सांस फूलने लगती है। खांसी आती है। सांस फूलने की वजह से मरीज को दो कदम चलना भी दूभर हो जाता है। डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि...
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