सहरसा, दिसम्बर 11 -- कहरा, एक संवाददाता। जैसे-जैसे ठंड बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस क्षेत्र में जलीय प्रवासी पक्षियों का आगमन तेज हो गया है। गांवों के किनारे फैले बहियार इस बार इन अतिथि परिंदों के लिए किसी प्राकृतिक अभ्यारण्य जैसे नजर आ रहे हैं। हर ओर से आती इनके पंखों की सरसराहट और कलरव से पूरा इलाका गुंजायमान है। इस वर्ष मोंथा चक्रवाती तूफान के कारण असमय बारिश हुई, जिससे सीमावर्ती प्रखंडों के कई बहियारों में भारी जलजमाव हो गया। दर्जनों एकड़ में लगी धान की फसल पानी में गिरकर बर्बाद हो गई। यही डूबा हुआ धान अब साइबेरियन जलीय पक्षियों का मुख्य आहार बन गया है, जिसके कारण इनकी संख्या बीते वर्षों की अपेक्षा कहीं अधिक दिख रही है। स्थानीय पर्यवेक्षकों के अनुसार इस क्षेत्र में मुख्यतः तीन प्रकार के जलीय प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। इनमें लगभग एक किलो व...
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