कन्नौज, फरवरी 18 -- कन्नौज। सरहद पर अपने फौलादी इरादों से दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाले हमारे जांबाज सैनिक अपने घर में अपनों से ही जंग लड़ रहे हैं। देश की रक्षा कर लौटे तो पता चला कि उनकी जमीनों पर कब्जे हो गए, अब जमीन छुड़ाने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। इसके अलावा बदहाल अस्पताल में बेहतर इलाज के लिए भी उनकी जंग जारी है। जिले में एक कैंटीन भी नहीं है, सामान लेने फतेहगढ़ और कानपुर की कैंटीन में जाना पड़ता है। ऐसी तमाम परेशानियों से जूझ रहे हैं पूर्व सैनिक। ड्यूटी के दौरान देश की सरहदों की सुरक्षा में हर पल तत्पर रहने वाले सैनिक देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह कर सेवानिवृत्ति के बाद जब अपने गांव या शहर लौटता है तो अपने आपको ठगा महसूस करता है। कारण- लंबे अरसे से अपनों से दूर होते हैं। ऐसे में सगे-संबंधियों और नाते रिश्तेदा...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.