लखनऊ, फरवरी 7 -- राज्य सरकार ने दावा किया है कि अधिकतम मांग के समय बिजली कटौती शून्य रह गई है। बिजली की मांग व आपूर्ति के बीच का अंतर लगभग शून्य के स्तर पर पहुंच गया है। सरकार का मानना है कि बेहतर बिजली आपूर्ति के चलते प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ा है और रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2022-23 में उत्तर प्रदेश की बिजली की कुल आवश्यकता 1 लाख 44 हजार 251 मिलियन यूनिट थी। योगी सरकार ने बिजली की मांग व आपूर्ति के अंतर को समाप्त करने के लिए नीतियों पर काम किया। वित्त वर्ष 2023-24 में आपूर्ति 1 लाख 48 हजार 287 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 1 लाख 64 हजार 786 मिलियन यूनिट हो गई। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक की स्थिति में व्यापक सुधार हुआ। इस अवधि में बिजली की कमी व्यावहारिक रूप से...
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