विशेष संवाददाता, जनवरी 10 -- सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी सरकारी शैक्षणिक संस्थान में सिर्फ दाखिला लेने या पढ़ाई पूरी करने से सरकारी नौकरी में स्वत: नियुक्त होने कोई जायज उम्मीद या अधिकार नहीं बनती है। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस फैसले को रद्द करते हुए यह फैसला दिया है, जिसमें सरकारी प्रशिक्षण संस्थान से नर्सिंग की पढ़ाई करने वालों को नौकरी देने का आदेश दिया गया था। जस्टिस राजेश बिंदल और मनमोहन की पीठ ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार की अपील को स्वीकार करते हुए कहा कि 'किसी सरकारी शैक्षणिक संस्थान में सिर्फ दाखिला लेने या पढ़ाई पूरी करने से सरकारी नौकरी में स्वत: नियुक्त होने कोई जायज उम्मीद या अधिकार नहीं बनती है, खासकर तब जब सरकार ने अपनी नीति और भर्ती के तरीके में बदलाव किया ...
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