नई दिल्ली, नवम्बर 24 -- प्रभात कुमार नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में सभी सरकारी और निजी संस्थानों में काम करने वाली महिला और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों के लिए 'माहवारी अवकाश' देने के लिए नीति बनाने और इसे लागू करने की सिफारिश की है। इसके तहत हर माह कर्मचारियों के लिए कुछ अवकाश निश्चित करने को कहा है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि माहवारी अवकाश देने के लिए जो नीति बनाई जाए, उसमें माहवारी स्वास्थ्य को वर्कप्लेस पर कल्याण का जरूरी और अनिवार्य पहलू माना जाना चाहिए, जो बराबरी, सम्मान और इंसानी काम करने के हालात की संवैधानिक गारंटी पर आधारित हो। सुप्रीम कोर्ट के शोध एवं योजना विंग यानी सीआरपी द्वारा जारी माहवारी अवकाश को लेकर जारी स्वेत पत्र में यह सिफारिश की गई है। देश के 52वें सीजेआई रहे जस्टिस बीआर गवई की देखरेख में तैयार इस स्वेतपत्र में कहा ...
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