रांची, जुलाई 8 -- रांची, विशेष संवाददाता। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ रमेश शरण एक शिक्षक, कार्यकर्ता और सुधारक भर नहीं थे, उनकी शख्सियत बहुआयामी थी। उन्होंने झारखंड के बौद्धिक और शैक्षणिक परिदृश्य पर गहरी छाप छोड़ी, जो आज भी प्रेरणा का स्रोत है। वह मानते थे कि शोध और शिक्षा को समाज की मूल समस्याओं से जुड़ना चाहिए। विशेषरूप से झारखंड जैसे राज्य में, जो संसाधन-संपन्न होते हुए भी ऐतिहासिक शोषण का शिकार रहा है। उनके शोध ने हाशिए के समुदायों को स्वर दिया। उनका सपना था कि झारखंड की शासन व्यवस्था को मजबूत किया जाए, इसके लिए उन्होंने वित्तीय अव्यवस्थाओं को सुधारने, राजस्व की कमी को दूर करने, नौकरशाही को नियंत्रित करने, भूमि सुधार लागू करने और समावेशी विकास के लिए दूरदर्शी योजनाएं तैयार करने की दिशा में सोच विकसित की। डॉ रमेश शरण त्वरित, तर्कसंगत और ...
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