नई दिल्ली, जनवरी 27 -- अस्थिर वैश्विक माहौल, भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और विकसित अर्थव्यवस्थाओं में सुस्ती के बीच पेश होने वाला आम बजट- 2026 भारत के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। यही बजट तय करेगा कि देश की आर्थिक रफ्तार को अगले कुछ वर्षों तक कैसे मजबूती दी जाएगी? यह सच है कि सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती विकास और कल्याण के बीच संतुलन बनाए रखने की है। उसे एक ओर बुनियादी ढांचे में निवेश को गति देना होगा, ताकि रोजगार-सृजन, औद्योगिक विस्तार और क्षेत्रीय संतुलन सुनिश्चित हो सके, तो दूसरी ओर महंगाई और आय-असमानता के दबाव में कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को निरंतर समर्थन देना होगा। इसीलिए, माना यही जा रहा है कि इस बार का बजट समावेशी विकास का दस्तावेज हो सकता है। उम्मीद यही की जा रही है कि सरकार सड़क, रेल, बंदरगाह और...