अयोध्या, दिसम्बर 7 -- बीकापुर। ख्यातिप्राप्त श्रीमद्भागवत कथा वाचक राधेश शास्त्री ने रविवार को अपने प्रवचन से भक्तों को अभिसिचिंत करते हुए कहा कि धूप से मुरझाए पौधे के लिए थोड़ा-सा जल भी जीवन का वरदान बन जाता है,उसी प्रकार नैराश्य की ज्वाला में झुलस रहे किसी व्यक्ति के लिए एक क्षण का सहारा भी प्राणदायक सिद्ध होता है। समाज में घटित होने वाली प्रत्येक घटना के प्रति संवेदनशील रहना,दूसरों की वेदनाओं को महसूस करना और अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहारा बनना ही सच्चे सामाजिक और मानवीय जीवन की पहचान है। ---- ----

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