वाराणसी, फरवरी 18 -- वाराणसी, वरिष्ठ संवाददाता। साहित्य तब सार्थक होता है जब वह समाज के काम आए, उसकी पंक्तियां चेतना का स्रोत बनें। यह बात इतिहासकार एवं पूर्व सांसद डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने कही। वह अशोका इंस्टीट्यूट में वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत की पुस्तक 'सपनों की पगडंडियां' के विमोचन पर विचार व्यक्त कर रही थीं। प्रो. सुरेंद्र सिंह कुशवाहा के जीवन को रेखांकित करते हुए कहा कि उनमें जिज्ञासा थी, आगे बढ़ने की बेचैनी थी और समाज के लिए कुछ कर गुजरने का साहस था। वरिष्ठ पत्रकार सुधीर मिश्रा ने कहा कि यह एआई का दौर है। आने वाले समय में पत्रकारिता किस रूप में होगी, इसका अनुमान लगाना आसान नहीं है। ऐसे समय में विजय विनीत ने पत्रकारिता और एआई जैसे विषयों पर गंभीर लेखन कर पत्रकारिता के विद्यार्थियों को दिशा दी है। रंगकर्मी व्योमेश शुक्ल ने भी विचार र...