संभल, मार्च 1 -- जिस गांव, जिस परिवार, जिस समाज में एकता नहीं रहती, वह तरक्की के रास्ते से उतर जाता है। जो गांव, जो समाज, जो परिवार एक दूसरे को समझ कर, एक दूसरे की भावनाओं को जानकर कार्य करते हैं, वह हमेशा आगे बढ़ते हैं। यह सदविचार कथा व्यास रजनीश शास्त्री ने श्रीमद भागवत कथा के दौरान व्यक्त किए। शहर से सटे गांव आटा में हो रही श्रीमदभागवत कथा के आठवें दिन कथा व्यास ने कहा कि जिस जाति में मेल नहीं होगा, वह जाति हमेशा पछताएगी, जिस गांव में मेल नहीं होगा, उस गांव की दुर्गति होगी। जिस घर में मेल नहीं होगा, वह प्रेम हमेशा के लिए तरसेगा। उन्होंने कहा कि समाज और परिवार को मिल-जुलकर रहना चाहिए। परिवार समाज की इकाई है और समाज का निर्माण परिवारों से ही होता है। मिल-जुलकर रहने से आपसी सहयोग बढ़ता है और जीवन आसान बनता है। इसलिए परिवार के सदस्यों के ब...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.