दरभंगा, जनवरी 11 -- आजादी से पहले दरभंगा की कृषि नदियों के बूते समृद्ध थी। फिर 1950-60 के दशक में तटबंधों के निर्माण का दौर शुरू हुआ। नेपाल से लेकर सीतामढ़ी, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर आदि जिलों में डैम बने। नदी धार प्रवाहों को मनमाने ढंग से डायवर्ट कर दिया गया। इसी का नतीजा है कि कुशेश्वरस्थान जैसा मशहूर वेटलैंड सूख रहा है और प्रवासी पक्षियों का आगमन थम चुका है। बागमती व कमला-बलान तटबंध से कई धाराओं का प्रवाह अवरुद्ध है। इसके चलते खेतों में जलजमाव, आर्सेनिक वाटर व पेयजल किल्लत जैसी समस्या उत्पन्न हुई। नदियों का प्रबंधन आधुनिक समय की जरूरत बन चुका है। विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों की राय अनुकूल पहल होनी चाहिए। नदियां स्वस्थ रहेंगी, तभी मानवीय सभ्यता सुरक्षित है। इसलिए नदियों की स्थिति पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। इन समस्याओं पर गंभीरता से वि...
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