नई दिल्ली, फरवरी 2 -- आज आदमी का मन समय को लेकर बहुत ज्यादा परेशान है। हर किसी को कहीं-न-कहीं जल्दी पहुंचना है। लोग लक्ष्य-केंद्रित हो गए हैं। अगर कोई लक्ष्य है, तो वहां जल्दी पहुंचना है, किसी और से भी ज्यादा जल्दी। इस रफ्तार के पागलपन की वजह से 'इंस्टेंट' चीजें बहुत ज्यादा पसंद आती हैं। रफ्तार जितनी बढ़ गई है, उतना अधैर्य बढ़ गया है। सब कुछ अभी चाहिए। भोजन का नाम भी हो गया 'फास्ट फूड'! इसका 'साइड इफेक्ट' भी है। तेज रफ्तार के साधनों की सनक ने लोगों को बहुत ज्यादा बेसब्र बना दिया है। इंतजार करना दंड भोगने जैसा मालूम होता है। इस रवैये ने लोगों से उनकी शांति, उनका आराम और उनकी नींद छीन ली है। नींद के लिए एक शांत दिमाग चाहिए, जो अपने आप में ठहरकर विश्राम कर सके। ओशो कहते हैं, मुझे इस स्थिति में एक सकारात्मक पहलू भी दिखता है। यह बात कि लोग एक पल...
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