नई दिल्ली, अक्टूबर 31 -- हमारे देश में सोना दादी-नानी और माता-पिता का आशीर्वाद है। सोने का आभूषण दरअसल भावनाओं की धरोहर होता है। जन्म से लेकर शादी तक यह पीली धातु जरूरी है, उपहार के लिए। यह सिर्फ श्रृंगार नहीं, परंपरा है। एक रिपोर्ट की मानें तो भारत का विवाह उद्योग सालाना 130 करोड़ अरब डॉलर से भी ज्यादा का है। इसमें सिर्फ आभूषणों का हिस्सा 35 से 40 अरब डॉलर का है। ऐसे में प्रति दस ग्राम सोने की कीमत एक लाख से भी ज्यादा हो जाना, शादियों के पूरे बजट को बिगाड़ रहा है। जनवरी से अब तक सोने की कीमतों में लगभग 67 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। सोने की बढ़ती कीमतों के पीछे कारण कुछ भी हो, लेकिन अपनी परंपरा को पीछे तो नहीं छोड़ा जा सकता? नई-नवेली दुल्हन को भला आभूषणों से महरूम कैसे रखा जा सकता है? सोने की बढ़ती कीमतों के बीच भी जुगत लगाकर आपको कुछ...
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