हरिद्वार, फरवरी 4 -- पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि सनातन धर्म का मूल स्वर संघर्ष नहीं बल्कि समन्वय है। विविधता में एकता नारा नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति का स्वभाव है। जहां समन्वय है वहां दीर्घकालिक निरंतरता है। हमें धर्म को समाज और अध्यात्म को राष्ट्र से जोड़ने का संकल्प लेना होगा। अध्यात्म को समन्वय से चलाएं। स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी ने हमें सिखाया है कि समाज में समन्वय बेहद आवश्यक है। उनका चिंतन वेदांत की गहराइयों से निकला था। वह एक ही संगम की धारा के तीन रूप थे। उनके द्वारा किए गए गए कार्य ने राष्ट्र को सभ्यता के रूप में प्रतिष्ठित किया। यह बात उन्होंने श्रीविग्रह मूर्ति स्थापना समारोह के पहले दिन मंच से कही। ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कहा कि उन्हें पूज्य...