नई दिल्ली, फरवरी 20 -- रिपोर्ट नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। जलवायु परिवर्तन का प्रभाव हर क्षेत्र में पड़ रहा है। एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि सदी के आखिर तक दुनिया के 36-40 फीसदी चारागाह खत्म हो जाएंगे। अगर जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल बढ़ता रहा, तो यह कमी 65 प्रतिशत तक जा सकती है। प्रोसीडिंग ऑफ नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित शोध के अनुसार, मौजूदा समय में घास आधारित चराई प्रणाली पृथ्वी की लगभग एक तिहाई सतह पर फैली है। यह दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य उत्पादन प्रणालियों में से एक है लेकिन जलवायु परिवर्तन इन चारागाहों के सुरक्षित जलवायु दायरे को सिकोड़ रहा है। वैज्ञानिकों ने पाया कि मवेशियों, भेड़ और बकरियों के लिए चराई का एक संतुलित दायरा होता है। इसमें तापमान -3 से 29 डिग्री, सालाना वर्षा 50 से 2627 मिमी, आर्द्रता 39-67 प्रतिशत और हव...
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