लखनऊ, जनवरी 19 -- नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने सदन की कार्यवाही कम समय चलने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सदन का समय घटने से जरूरी मुद्दों पर उचित बहस नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि जब पीठासीन अधिकारी सत्ता और विपक्ष दोनों को समान दृष्टि से देखते हैं। जब वे नियमों के संरक्षक बनते हैं न कि किसी पक्ष के, जब वे सदन को बहस का मंच बनाए रखते हैं न कि शक्ति प्रदर्शन का, तभी संसद और विधानसभाएं वास्तव में लोकतंत्र के मंदिर बनती हैं। पांडेय ने कहा कि एक परिपक्व लोकतंत्र में राजनीतिक विपक्ष बाधा नहीं, बल्कि संतुलन का माध्यम होता है। राजनीतिक प्रतिद्वंदिता लोकतंत्र के आभूषण होते हैं। वे व्यवस्था को चुनौती देकर उसे जड़ होने से बचाते हैं, किंतु जब प्रतिद्वंदिता शत्रुता में बदल जाती है, जब असहमति को राष्ट्रद्रोह और आलोचना को अवरोध समझा जाने लग...
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