सहरसा, फरवरी 23 -- सहरसा। रविवार को गायत्री शक्तिपीठ में व्यक्तित्व परिष्कार सत्र आयोजित हुआ। सत्र को संबोधित करते हुए डाक्टर अरुण कुमार जायसवाल ने वर्ण और जाति की व्याख्या की। कहा हिंदू जीवनशैली में सद्‌गुण और समृद्धि साथ साथ चलते हैं। वेद में यही समझाया गया है। वेद में जाति का कॉन्सेप्ट नहीं है। भगवद्‌गीता में भी जाति की नहीं वर्ण की चर्चा है। व्यक्तित्व के प्रकार के आधार पर वर्ण का विभाजन हुआ। चित में जो कर्म और संस्कार लेकर पैदा होता है उस आधार पर उसका व्यक्तित्व बनता है। गुण का मतलब सद्‌गुण और अवगुण भी होता है, गुण का मतलब प्रकृति के तीन गुण भी होते हैं, सत रज तमा तो सतोगुण रजोगुण और तमोगुण के आधार पर जो कर्म करते है उस आधार पर विभाजन है। इस अवसर पर पूनम कुमारी,संजीव कुमार मोनिका कुमारी, अभिनव कुमार व शक्तिपीठ के सभी परिजन उपस्थित थे...