बागपत, जनवरी 8 -- बड़ौत। अजितनाथ सभागार मंडी में धर्म सभा का आयोजन किया गया। आचार्य विमर्श सागर ने प्रवचन करते हुए कहा कि आत्मा की सफाई होने के उपरांत, आत्मा के दिव्य आसन में सत्य का देवता विराजमान हो जाता है। धर्म अनुभूति को सत्य कहता है, शब्द को नहीं। सत्य को शब्दों की बोतलों में कैद नहीं किया जा सकता है। शब्दों के माध्यम से जो भी कहा जाता है वह पूर्ण सत्य नहीं होता, शब्द जड़ है, मृत है, सीमित है। सत्य चेतन है, जीवंत है, असीमित है। फिर भी जब तक व्यक्ति बाह्य सत्य से परिचित नहीं होता, तब तक वह अंदर के सत्य से परिचय नहीं कर पाता। कहा कि सत्य मिश्री की भांति है। मिश्री कहीं से भी खाई जाए, मीठा ही स्वाद आता है। धर्मसभा में महेंद्र जैन, मदन लाल जैन, मुकेश जैन, प्रदीप जैन, वरदान जैन, विवेक जैन, दिनेश जैन आदि रहे।
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