गोरखपुर, फरवरी 15 -- गोरखपुर, निज संवाददाता। शहर के जैन मंदिर में शनिवार को नेपाल केसरी राष्ट्र संत डॉ. मणिभद्र मुनि जी महाराज ने श्रद्धा के अर्थ प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रद्धा का अर्थ वह भावदशा है जो सत्य से सृजित हुई है। श्रद्धा का जन्म सत्य के गर्भ से होता है। सत्य के गर्भ से समुत्पन्न श्रद्धा अकाट्य, अटूट और अटल होती है। उस श्रद्धा को कोई छीन नहीं सकता है। उस श्रद्धा को कोई विचलित नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि सत्य से उत्पन्न श्रद्धा को भगवान महावीर ने सम्यक् श्रद्धा कहा है। जगत के अधिकतम लोग मान्यता से समुत्पन्न श्रद्धा को जीते हैं। इसलिए हम आए दिन श्रद्धा की उठती हुई अर्थियां देखा करते हैं। जरा-सी हवा बहती है और लोगों की आस्थाएं हिल जाती हैं। ऐसी आस्था और ऐसी श्रद्धा जो मान्यता से निकली है का नष्ट हो जाना ही श्रेष्ठ है, क्य...