पाकुड़, अप्रैल 27 -- हिरणपुर। एसं स्थानीय देवपुर बजरंगबली मंदिर प्रांगण में आयोजित भागवत कथा के छठे दिन वृन्दावन से पधारें स्वामी अभयानंद अभिषेक शास्त्री ने उपस्थित लोगों से कहा कि ईश्वर सर्वव्यापी और सर्वत्र है। दुःख मानव जीवन में तभी आता है, जब मनुष्य ईश्वर से दूर होता है। चूंकि दुख और सुख भगवान का ही दो स्वरूप है। इसलिए दुःख ओर सुख दोनों में ईश्वर का स्मरण करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि श्रीमद्भागवत कथा वंदनीय है। अतः ये तीनों प्रकार के पापों का नाश करने में निपुन्य है। ईश्वर के आधार के बिना जीवन निराधार है। मनुष्य अन्त में सब कुछ छोड़ कर चला जाता है, जिसके लिए उसने सारा जीवन मेहनत किया। परंतु कुछ काम नहीं आया। अन्त काल में जीव पछतावा करते हुए कहता है कि मनुष्य अपने पूरे जीवन काल में संग्रह करता है फिर भी दुखी है और पशु कुछ भी संग्रह न...
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