फतेहपुर, अप्रैल 14 -- फतेहपुर। छुट्टा पशुओं की संख्या में लगातार हो रहे इजाफा से विभागीय कार्यशैली पर सवाल उठ रहा है। सड़कों पर घूमने वाले पशुओं से हादसों का भय और ट्रैफिक व्यवस्था बिगड़ती है। हमलावर होने की दशा में लोग चोटहिल होते हैं। गौशालाओं में संरक्षण के बजाय कागजों को मेनटेन तक कार्रवाई सीमित है। यही कारण है समस्या जस की तस बनी हुई है। शहर से लेकर गांव गांव तक आवारा पशुओं के स्वछंद विचरण से ग्रामीण व शहरी परेशानियों से जूझ रहे है। लहलहा रही फसलों पर झूंड में पशुओं की तबाही का मंजर किसान निहारता रहता है। लाठी डंडा उठाने पर पशु हमलवार तक हो जाते है। वहीं सड़कों गलियों प्रमुख चौराहों में पशुओं का जमावड़ा यातायात तो प्रभावित करता ही है हादसों का भी सबब बनते है। कभी कबार झुंडो के पशु आपस में भिड़ने से परेशानियां उत्पन्न होती है। ऐसा ही ...
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