नई दिल्ली, नवम्बर 30 -- नवनीत सहगल, चेयरमैन, प्रसार भारती पिछले पांच दशकों में भारत ने कई आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का मुकाबला किया है। अलगाववाद, आतंकवाद और संगठित चरमपंथ ने समय-समय पर देश की स्थिरता और लोकतंत्र को चुनौती दी। इन सभी में सबसे लंबा, रक्तरंजित और जटिल संघर्ष वामपंथी उग्रवाद, यानी नक्सलवाद का रहा, जिसने एक समय देश के 126 जिलों को हिंसा, भय और अस्थिरता की चपेट में ले लिया था। यह आंदोलन सुरक्षा के मोर्चे पर ही नहीं, देश में विकास की गति, प्रशासनिक ढांचे और ग्रामीण जीवन पर लगातार चोट करता रहा। आज दशकों बाद जब नक्सलवाद अतीत की कहानी बनने जा रहा है, तब यह सफलता कल्पना से परे लगती है, लेकिन यह सच है। ऐसे में, इस निर्णायक परिवर्तन के कारणों और रणनीति का अध्ययन बहुत आवश्यक है। इस कामयाबी के पीछे जो सबसे स्पष्ट कारण दिखाई देता है, वह ह...
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