औरंगाबाद, जनवरी 11 -- नवीनगर नगर पंचायत के वार्ड नंबर बारह अंतर्गत भवानोंखाप स्थित संगत परिसर में गो गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथावाचक अनिल शास्त्री ने कहा कि भगवान की सच्ची भक्ति करने वाला मनुष्य अंततः वैकुण्ठ को प्राप्त करता है। कथा के दौरान उन्होंने तुंगभद्रा नदी तट पर बसे गांव की पौराणिक कथा सुनाई, जहां आत्मदेव नामक ब्राह्मण अपनी पत्नी धुंधली के साथ रहते थे। आत्मदेव धर्मपरायण थे, जबकि धुंधली दुष्ट प्रवृत्ति की थी। संतान न होने से दुखी आत्मदेव आत्महत्या का विचार करने लगे और जंगल की ओर निकले, जहां उनकी भेंट एक ऋषि से हुई। ऋषि ने उन्हें एक फल देकर पत्नी को खिलाने और एक वर्ष तक सात्त्विक जीवन जीने का निर्देश दिया। धुंधली ने संतान के भय से फल नहीं खाया और गर्भवती होने का नाटक कर बह...