दरभंगा, अक्टूबर 22 -- हिन्दी समाहार मंच, दरभंगा के संस्थापक अध्यक्ष तथा हाल ही में पूर्वाशा हिन्दी अकादमी, जोरहाट (असम) से सम्मानित साहित्यकार शेखर कुमार श्रीवास्तव ने कहा है कि बिहार में एक बार फिर चुनावी डुगडुगी बज गई है। निश्चित तौर पर नेतागण जनता से मुखातिब होंगे। भाषणों में लच्छेदार मुहावरे होंगे, वायदे किए जाएंगे, लोक लुभावन नारे गूंजेंगे, जनकल्याणकारी नीतियों का उद्घोष भी होगा। ऐसे में हमें पड़ताल करनी होगी कि नेता बांधव चुनावी समर में संवेदना की कौन-सा तीर चलाएंगे। प्राय: ऐसा देखा गया है कि नेता चुनने और मंत्री बनने तक की प्रक्रिया में वे ईश्वर की शपथ लेते हैं, सत्यनिष्ठा का श्लोक पढ़ते हैं, पर सत्तासीन होते ही वे राजभोग में लिप्त हो जाते हैं जो बड़ा ही दुखदायी और प्रजातंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्हें समझ लेना चाहिए कि जनता आज ...
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