नई दिल्ली, नवम्बर 20 -- नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ ने भले ही उसका संवैधानिक पाठ तुलनात्मक नजरिए से प्रेरित हो, लेकिन उसकी व्याख्या और काम करने का तरीका सही मायने में 'स्वदेशी' है। राष्ट्रपति के संदर्भ के सवालों का जवाब देते हुए, संविधान पीठ ने कहा है 'बिना लिखे संविधान के इंग्लिश अनुभव के उलट, भारत का एक लिखा हुआ संवैधानिक टेक्स्ट है। पीठ ने कहा कि कार्यपालिका और विधायिका के बीच शक्तियों के सख्त बंटवारे के कारण अमेरिकी अनुभव बहुत अलग है, जिसके लिए प्रेसिडेंशियल वीटो की जरूरत पड़ती है। संविधान पीठ की अगुवाई कर रहे सीजेआई बीआर गवई ने कहा कि 'जो बात कही जा रही है वह यह है कि भारतीय संविधान सिर्फ अपनाने में ही बदलाव लाने वाला नहीं है, बल्कि यह अपने इस्तेमाल और मतलब में भी बदलाव लाने वाला रहा है और आगे भी...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.