नई दिल्ली, नवम्बर 16 -- पिछले दिनों अनुराग बेहर ने एक लेख लिखा था, जिसमें उन्होंने एआई की तुलना ड्रग्स से की थी और इसे बच्चों के लिए नुकसानदेह बताया था। मेरी राय में यह काफी अतिरंजित सोच है। तकनीक को शिक्षा का हिस्सा बनाना चाहिए या नहीं, इस पर चर्चा ही बेमानी है, क्योंकि तकनीक अब शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न अंग बन चुकी है। इसे हम कितना नकारेंगे और कहां तक नकारेंगे? क्या हम लैपटॉप बंद कर देंगे या मोबाइल? सोशल मीडिया बंद करेंगे या ई-मेल? अब कोई भी एप या यंत्र एकाकी नहीं है। अगर एक यंत्र या एप आप उपयोग कर रहे हैं, तो वह तमाम तरह की सूचनाएं संकलित कर रहा है और उनको अन्य माध्यमों के साथ साझा करके अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। साफ है, हमें तकनीक के चयनात्मक विरोध से बचना चाहिए। ऐसा नहीं हो सकता कि आप अपने विश्वविद्यालय में तकनीक को अपनाएं, मगर स्कूलों...
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