मुंबई, मई 8 -- बलात्कार से जुड़े एक मामले में फैसला सुनाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस बात को दोहराया है कि महिला के 'ना' कहने का मतलब ना ही होता है और इस संबंध में और कोई भी दलील नहीं दी जा सकती है। हाइकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान इस बात पर भी जोर दिया है कि महिला की पिछली अनुमति के आधार पर संबंध बनाने के लिए उसकी इजाजत को पहले से ही तय नहीं माना जा सकता है। इस दौरान कोर्ट ने बलात्कार के 3 आरोपियों की सजा बरकरार रखी है। उच्च न्यायालय ने आरोपियों द्वारा पीड़िता की नैतिकता पर सवाल उठाने की कोशिश को मानने से इनकार करते हुए यह टिप्पणियां की हैं। जस्टिस नितिन सूर्यवंशी और जस्टिस एम डब्ल्यू चांदवानी की पीठ ने 6 मई के अपने फैसले में यह भी कहा कि जब किसी महिला की सहमति के बिना उससे यौन संबंध बनाए जाते हैं, तो यह न सिर्फ उसके शरीर पर हमला ह...
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