नई दिल्ली, नवम्बर 19 -- हर्ष वी पंत,प्रोफेसर, किंग्स कॉलेज लंदन पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय यात्रा पर भूटान में थे। दक्षिण एशिया की तेजी से बदलती भू-रणनीतिक स्थिति के बीच इस पड़ोसी देश के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की ओर इस दौरे ने सबका ध्यान आकर्षित किया है। इस यात्रा का मकसद भूटान के हालात को समझना तो था ही, वहां की लोकप्रिय राजशाही के प्रति जुड़ाव को भी रेखांकित करना था। आज भूटान दोराहे पर खड़ा है। दशकों से अनसुलझे आर्थिक-सामाजिक समस्याओं के साथ आर्थिक विविधता के अभाव के कारण वहां पर बेरोजगारी दर 17.8 प्रतिशत तक पहुंच गई है। हाल के वर्षों में भूटान की नौ प्रतिशत से अधिक आबादी पलायन कर चुकी है, जिससे देश की कार्यशील आबादी और नौकरशाही कमजोर पड़ गई है। साल 2027 तक वहां बुजुर्गों की संख्या सर्वाधिक हो जाएगी। उधर चीन की ओ...
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